हमारा देश हमारा राज की स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती समारोह सफलतापूर्वक संपन्न

चितरंगी से दिलीप कुमार गुप्ता की खास रिपोर्ट।

सिंगरौली/चितरंगी— सेक्टर दुधमनिया के ग्राम अमलिहवा में हमारा देश हमारा राज नारे के प्रणेता एवं महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम पंचायत खम्हनिया के सरपंच तेज प्रताप सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक विश्वनाथ रैदास, जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह पैगाम, जिला पंचायत सदस्य सोमदेव ब्रह्म, जनपद सदस्य सरस्वती सिंह, पूर्व विधायक, ग्राम पंचायत बगैयाक के सरपंच दरोगा सिंह, आयाम समाजसेवी रामपति सिंह, संतलाल सिंह, हीरा सिंह, पूर्व उपसरपंच दादी सिंह, दुर्गा सिंह आयाम, परामर्शदाता राजकुमार सिंह, तथा नवांकुर संस्था एवं संकल्प शक्ति सेवा समिति के सचिव दिलीप कुमार गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात ग्रामीण परंपरा अनुसार सभी अतिथियों का पुष्पमाला एवं चंदन लगाकर स्वागत-सत्कार किया गया।विशिष्ट जनों के उद्बोधन विकासखंड समन्वयक विश्वनाथ रैदास ने अपने संबोधन में बिरसा मुंडा के जीवन व योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातू गांव में हुआ था। ‘उलगुलान आंदोलन’ के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जल-जंगल-जमीन तथा आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उनका नारा “हमारा देश, हमारा राज” आज भी जनजातीय अस्मिता का प्रतीक है। जिला पंचायत सदस्य सोमदेव ब्रह्म ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा एक महान क्रांतिकारी, राष्ट्रहितैषी और जनजातीय समाज के कल्याण हेतु समर्पित योद्धा थे। उन्होंने आदिवासी शासन एवं स्वतंत्रता की मांग को प्रबल स्वर दिए।पूर्व विधायिका श्रीमती सरस्वती देवी ने कहा कि बिरसा मुंडा ने समाज को एकता, संगठन और संघर्ष का संदेश दिया। आज भी उनकी शिक्षाएं समाज को कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करती हैं।
जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह पैगाम ने बताया कि बिरसा मुंडा ने जमींदारी प्रथा एवं धर्मांतरण का कड़ा विरोध किया। वे औषधि विज्ञान के ज्ञाता थे और लोगों का उपचार भी करते थे, जिसके कारण लोग उन्हें ईश्वर स्वरूप मानते थे। मुख्य अतिथि सरपंच तेज प्रताप सिंह ने कहा कि मात्र 25 वर्ष की अल्प आयु में भगवान बिरसा मुंडा ने वह कर दिखाया जो इतिहास में अमर है। उन्होंने जल-जंगल-जमीन की रक्षा, जनजातीय अधिकारों और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उनकी गिरफ्तारी 3 फरवरी 1900 को हुई और 9 जून 1900 को उनकी मृत्यु हो गई—परंतु उनके विचार आज भी अमर हैं। उक्त कार्यक्रमका संचालन एवं आभार प्रदर्शन संकल्प शक्ति सेवा समिति के सचिव दिलीप गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण जनों की उपस्थिति रही, जिन्होंने बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

Leave a Reply